About us
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Illuminating your path
आधुनिक जीवन की जटिलताओं के बीच, शांति और समझ पाने के लिए ज्योतिषीय मार्गदर्शन की तलाश करने वाले लोगों का समुदाय बढ़ रहा है।
हम मानते हैं कि ज्योतिष केवल भविष्यवाणियां नहीं, बल्कि आत्म-ज्ञान का एक शक्तिशाली साधन है। हमारा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान के प्रकाश से आपके जीवन के रास्तों को स्पष्ट करना है, ताकि आप आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें और अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान सकें
FIND YOUR DESTINY WITH ASTRONIYATI
नमस्ते! एस्ट्रोनियति में आपका स्वागत है, जहाँ हम प्राचीन भारतीय ज्ञान के प्रकाश में आपकी जीवन यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं। जैसा कि हमारा आदर्श वाक्य है— "Art of Letting Go" (छोड़ने की कला)—हमारा उद्देश्य आपको अतीत के बोझ और भविष्य की चिंताओं से मुक्त कर, वर्तमान को स्वीकार करने और अपनी नियति के साथ सामंजस्य बिठाने में मदद करना है।
हमारी नींव: वैदिक ज्योतिष और वेदों का ज्ञान
हमारा कार्य भारत की हज़ारों वर्षों पुरानी, समृद्ध विरासत 'वैदिक ज्योतिष' पर आधारित है। यह केवल भविष्य बताने का साधन नहीं है, बल्कि वेदों का एक अभिन्न अंग है। हमारे पवित्र वेद ज्ञान के सागर हैं, और ज्योतिष को वेदों का नेत्र माना गया है। जैसा कि संस्कृत के प्राचीन श्लोक में कहा गया है:
।। ज्योतिषं वेदानां चक्षुः ।।
(अर्थात्: ज्योतिष वेदों का नेत्र है। यह हमें जीवन के मार्ग को स्पष्ट रूप से देखने और समझने की दृष्टि प्रदान करता है।)
जन्म कुंडली: आपका ब्रह्मांडीय मानचित्र
हम जो 'जन्म कुंडली' (Janam Kundli) तैयार करते हैं, वह कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके जन्म के सटीक क्षण पर ब्रह्मांड का एक चित्र है। यह उन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति को दर्शाता है जिन्होंने आपके व्यक्तित्व को आकार दिया है।
आपकी कुंडली में शामिल तत्व—जैसे आपका नाम, जन्म तारीख, समय, जन्म स्थान, जन्म नक्षत्र, राशि, पाया और गण—आपके जीवन की कहानी के महत्वपूर्ण अध्याय हैं। एस्ट्रोनियति में, हम इन तत्वों का विश्लेषण करके आपको आपके जीवन के पैटर्न को समझने में मदद करते हैं।
कर्म और नियति: रामचरितमानस का मार्गदर्शन
हम मानते हैं कि जीवन कर्म और नियति का संतुलन है। वैदिक ज्योतिष हमें नियति का खाका दिखाता है, लेकिन कर्म हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस की यह चौपाई हमारी प्रेरणा है:
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस की यह चौपाई हमारी प्रेरणा है:
।। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावहिं साखा ।।
(अर्थात्: वही होगा जो विधाता ने रच रखा है। व्यर्थ का तर्क करके चिंता बढ़ाने से लाभ नहीं है, हमें ईश्वरीय इच्छा को स्वीकार कर कर्म करना चाहिए।)
एस्ट्रोनियति में, हम आपको इसी सत्य को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि आप जीवन के प्रवाह के साथ शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ सकें।
